Puja Vidhi: क्यों की जाती है आरती? जानिए इसके नियम और इससे होने वाले फायदे
Puja Vidhi: आरती को ‘आरात्रिक' यानी ‘नीराजन' के नाम से भी जाना जाता है। हर घर और मंदिर में आरती के अलग-अलग नियम होते हैं। केवल इस काल में ही नहीं बल्कि प्राचीन काल में भी प्रभु की उपासना कई विधियों में की जाती थी। जिनमें संध्या वंदन, प्रात: वंदन, प्रार्थना, हवन, ध्यान
Puja Vidhi: आरती को ‘आरात्रिक’ यानी ‘नीराजन’ के नाम से भी जाना जाता है। हर घर और मंदिर में आरती के अलग-अलग नियम होते हैं। केवल इस काल में ही नहीं बल्कि प्राचीन काल में भी प्रभु की उपासना कई विधियों में की जाती थी। जिनमें संध्या वंदन, प्रात: वंदन, प्रार्थना, हवन, ध्यान, भजन, कीर्तन आदि शामिल हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर आरती पूजा के अंत में क्यों की जाती है?
आरती क्यों करते हैं?
ऐसा माना जाता है कि यदि पूजन विधि में कुछ अधूरा रह गया हो तो आरती के माध्यम से उसकी पूर्ति की जा सके। आरती मुख्यत 7 प्रकार की होती है। जिनमें मंगला आरती, पूजा आरती, श्रृंगार आरती, भोग आरती, धूप आरती, संध्या आरती, शयन आरती, आदि शामिल हैं।
कैसे की जाती है आरती?
5 या 7 बत्ती वाले दीपक से आरती करना शुभ माना गया है।
मंदिरों में ज्यादातर 5 बत्तियों वाली आरती की जाती है, जिसे ‘पंचप्रदीप’ कहा जाता है।
आरती को जलाने के बाद दीपक को प्रणाम किया जाता है।
रुई या कपास की बत्ती के अलावा कर्पूर से भी आरती की जाती है।
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