तीन दोष
वात — वायु + आकाश; गति, साँस, स्नायु। पित्त — अग्नि + जल; पाचन, ताप, बुद्धि। कफ — पृथ्वी + जल; संरचना, स्नेह, वज़न। हर शरीर इन तीन में से एक या दो को अपनी प्रकृति के रूप में लिए होता है।
अपना दोष पहचानिए
दुबला शरीर, कभी न रुकने वाला मन, ठंडा बदन, कच्ची नींद → वात। मध्यम शरीर, तेज़ भूख, गुस्सा, बहुत पसीना → पित्त। भारी शरीर, धीमी बोली, शांति, ज़्यादा नींद → कफ। ज़्यादातर लोग ‘वात-पित्त’ या ‘पित्त-कफ’ जैसे मिश्रण होते हैं।
दिनचर्या
सूर्योदय से पहले उठिए। एक गिलास गुनगुना पानी। तेल से कुल्ला (oil pulling) — 5 मिनट। जीभ की सफ़ाई — 30 सेकंड। स्नान से पहले अभ्यंग (गुनगुने तेल की मालिश)। तीन वक़्त का भोजन — रोज़ एक ही समय पर।
अपने दोष के अनुसार भोजन
वात — गर्म, नम, मीठा (चावल, दूध, घी)। पित्त — ठंडा, कड़वा, मीठा (खीरा, अनार, दही)। कफ — तीखा, कड़वा, कसैला (मिर्च, धनिया, काली मिर्च)। अपने दोष की अधिकता को उल्टे स्वाद से संतुलित किया जाता है।
रोज़ काम आने वाली 5 जड़ी-बूटियाँ
हल्दी — सूजन-रोधी। अदरक — पाचन और बुख़ार। तुलसी — रोग प्रतिरोधक क्षमता और तनाव। अश्वगंधा — ऊर्जा और मन की शांति। त्रिफला — गैस और सफ़ाई।