आठ दिशाएँ और उनके देवता
उत्तर — कुबेर (धन)। उत्तर-पूर्व — ईशान (देवता)। पूर्व — इंद्र (यश)। दक्षिण-पूर्व — अग्नि (ऊर्जा)। दक्षिण — यम (ठहराव)। दक्षिण-पश्चिम — नैऋत्य (स्थिरता)। पश्चिम — वरुण (लाभ)। उत्तर-पश्चिम — वायु (यात्रा)। हर कमरा सही दिशा में हो तो वह ऊर्जा घर में आती है।
कौन सा कमरा — किस दिशा में
रसोई — दक्षिण-पूर्व (अग्नि की दिशा)। पूजा घर — उत्तर-पूर्व। मुख्य शयनकक्ष — दक्षिण-पश्चिम। बच्चों का कमरा — उत्तर-पश्चिम या पश्चिम। शौचालय — दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पश्चिम। पढ़ाई का कमरा — पश्चिम। मुख्य दरवाज़ा — उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व की सलाह।
ईशान कोण क्यों अहम है
यही वह दिशा है जहाँ से सुबह सूरज उगता है — घर में आने वाली UV किरणें सबसे ज़्यादा यहीं से आती हैं। उत्तर-पूर्व में पानी (भंडारण, कुआँ), खुली जगह (छत), पूजा घर रखिए। भारी सामान या शौचालय नहीं। रुकावट नहीं। ईशान कोण में कमल के फूल वाला एक छोटा पात्र — समृद्धि बढ़ाता है, ऐसा कहा जाता है।
जिन ग़लतियों से बचें
1. ईशान कोण में शौचालय। 2. मुख्य दरवाज़े के ठीक सामने दरवाज़ा या दीवार (ऊर्जा दीवार से टकराती है)। 3. दक्षिण-पश्चिम में सिर उत्तर की ओर करके सोना (चुंबकीय खिंचाव)। 4. चूल्हा और पानी — बग़ल-बग़ल (आग-पानी की लड़ाई)। 5. खड़ा आईना बिस्तर को सीधे दिखाए।
किराए के घर के लिए आसान उपाय
निर्माण नहीं बदल सकते? ये पाँच: 1. मुख्य दरवाज़े पर ‘ॐ’ या स्वस्तिक। 2. ईशान कोण साफ़ रखिए, साथ में कमल। 3. सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व की ओर। 4. रसोई में पूर्व की ओर मुँह करके पकाइए। 5. पढ़ते समय मुँह पूर्व या उत्तर की ओर।