Marriage Rituals: हिंदू धर्म में कई तरह के रीति-रिवाज को फॉलो किया जाता है। विवाह के दौरान भी बहुत से रीति-रिवाज का पालन किया जाता है। जैसे कन्यादान, सात फेरे, मंगलसूत्र पहनना और गृह प्रवेश। इन्हीं में से एक रिवाजों यह भी होता है कि शादी के दौरान एक मां अपने बेटे के फेरे नहीं देखती है, इसके पीछे क्या कारण है? आइए जानते हैं।

मुगल काल की है परंपरा
मान्यताओं के अनुसार पहले मताएं अपने बेटें की शादी में जाती थीं, लेकिन जब भारत में मुगलों का आगमन हुआ था, उन्होंने अपने बेटे की शादी में जाना छोड़ दिया है। मुगल शासन के दौरान महिलाएं बारात में भी जाती थीं। तब पीछे से कई बार डकैती और चोरी हो जाया करती थी, जिस कारण से महिलाओं ने बारात में जाना छोड़ा दिया और घर में सभी महिला एकत्रित होकर गीत गाती थीं।
कहां-कहां आज भी प्रचलित है ये परंपरा?
भारत में आज भी कई जगहों पर ये परंपरा देखने को मिलती है, जिनमें उत्तराखंड, बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्य शामिल हैं। इन जगहों पर बेटे की शादी में माताएं आज भी नहीं जाती हैं। हालांकि, समय के साथ-साथ लोगों की सोच भी बदल रही हैं। आजकल मां अपने बेटे की शादी में जाती हैं।






